Inner Engineering Book Summary

Inner Engineering Book Summary in Hindi

Inner Engineering topic में इस article तक पहुँचने  के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद ! आप  की मौजूदगी इस बात का प्रूफ है कि आप सेल्फ इंप्रूवमेंट के लिए कितने प्रयत्नशील है। इस चाहत को ध्यान में रखते हुए मैं आज सभी को  Inner Engineering Book की Summary हिन्दी में देने वाला हूं। 

Inner Engineering book सेल्फ इंप्रूवमेंट की फील्ड में दिन प्रतिदिन नए-नए कीर्तिमान स्थापित करती जा रही है। न्यूयॉर्क टाइम्स के लिस्ट में बेस्टसेलर के रूप में रजिस्टर्ड हो चुकी है। साथ ही दुनिया भर के 14 से ज्यादा भाषाओं में प्रकाशित भी की जा चुकी है । जी हां दोस्तों मैं बात कर रहा हूं सदगुरु जी द्वारा लिखित बुक Inner Engineering के बारे में। मैं आप सभी से एक बात कहना चाहता हूं, इस बुक में  इतनी सारी महत्वपूर्ण जानकारियां है कि सभी को शामिल कर पाना इतना आसान नहीं है,  इसके लिए आपको एक बार तो इस बुक को जरूर पढ़ना चाहिए, लेकिन फिर भी मैंने अपना भरपूर प्रयास किया है कि अब तक ज्यादा से ज्यादा चीजें पहुंचा सकूं।

Sadhguru Introduction

Sadhguru Introduction

ईशा फ़ाउंडेशन के संस्थापक और Inner Engineering किताब के लेखक सदगुरु जी का जन्म मैसूर में हुआ था।वे चार भाई-बहनों में सबसे छोटे थे।उनकी मां एक धार्मिक घरेलू महिला थी और पिताजी एक डॉक्टर थे। सदगुरु बचपन में काफी जिज्ञासु और चंचल स्वभाव के थे, उनकी चंचलता कभी उन्हें अपने क्लास में बैठने नहीं देती। जिसका नतीजा यह होता था कि वह बहुत जल्दी ही अपने क्लास में ऊब जाते और कुछ समय पश्चात तो अपनी क्लास ही छोड़ कर के जंगलों में चले जाते, वो इधर-उधर घूमते रहते, या फिर सांप और मछलियां पकड़ते।पहाड़ों पर और पेड़ों पर चढ़ना उन्हें बहुत पसंद आता था।अक्सर वह लंच बॉक्स और पानी की बोतल के साथ पेड़ की सबसे ऊंची डाल पर जाकर बैठ जाते। उन्हें पेड़ की शाखाओं का हिलना डुलना काफी अच्छा लगता था। 

जिज्ञासु प्रवृत्ति के होने के कारण अक्सर उनके मन में तरह-तरह के सवाल उठते रहते-  जैसे ईश्वर कौन है? वह कहां रहता है? वहां ऊपर,  ऊपर कहां होता है? ऐसे बहुत सारे सवाल उनके मन में आते थे। बहुत जल्दी उन्हें एहसास हो गया कि “मैं किसी भी चीज के बारे में कुछ भी नहीं जानता”। 

ऐसे ही वक्त गुजरता रहा और वह बड़े हुए। एक दोपहर वह अपनी बाइक पर सवार होकर चामुंडा पहाड़ी की तरफ चल दिए। वहां पर पहुंच कर उन्होंने अपनी बाइक खड़ी की और करीब दो तिहाई पहाड़ी चढ़ने के बाद एक शिला पर आंखें बंद करके बैठ गए। जब आंख खुली तो उन्हें लगा कि अभी 10 मिनट ही गुजरे हैं और जब घड़ी देखा तो करीब साडे 4 घंटे बीत चुके थे।

सदगुरु जी ने योग का कोई भी ग्रंथ कभी पूरा नहीं पढ़ा उन्होंने आंतरिक अनुभव को ही अपना आधार बनाया। अपने आंतरिक अनुभव को आधार बनाकर आज वो जिस ऊंचाई पर पहुंचे हैं, तो सोचिए उनके इस Inner Engineering book में आपको क्या क्या मिलने वाला है। 

Inner Engineering Book

Inner Engineering किताब को उन्होंने दो खंडों में बांटा है पहले में एक रोडमैप बनाया है, और दूसरे में उस पर चलने के तरीके सुझाए गए हैं। उनका कहना है कि हर मुश्किल का हल आपके अंदर ही है।आपका शरीर और दिमाग तभी बेहतरीन ढंग से काम करते हैं जब आप प्रसन्न रहते हैं। अगर आप 24 घंटे तक आनंद की स्थिति में रह सके तो आपकी बौद्धिक क्षमता लगभग दोगुनी हो सकती है लेकिन आम जनमानस की सबसे बड़ी समस्या यह है कि आपने आप को तमाम तरह की बाहरी बकवास से भर लिया है। कितनी अजीब बात है कि आप उन चीजों को लेकर परेशान रहते हैं जो 10 साल 15 साल पहले आपके साथ घटित हुई है या फिर इस बात को सोच सोच कर परेशान होते रहते हैं कि कल कुछ होने वाला है? लेकिन दोनों ही जीवंत वास्तविकता नहीं है यह सब आपकी स्मृति, कल्पना  और विचारों का खेल है। जब तक आपका आंतरिक जीवन बाहरी हालात का गुलाम रहता है तो हमेशा संकट पूर्ण  स्थिति बनी रहेगी।

फिर इससे बाहर निकलने का तरीका क्या है? बाहर निकलने का तरीका बहुत ही आसान है। आपको यह समझने की जरूरत है कि आपके अनुभव का स्रोत और आधार दोनों ही आपके अंदर है। इसलिए क्लैश मिटाने का रास्ता, पीड़ा से मुक्ति का रास्ता बाहर मत खोजिए, केवल एक ही रास्ता है और वह अपने अंदर ही है।

Create your own destiny खुद बनाएँ अपना भाग्य 

जब आपको यह एहसास होता है कि आपके सारे अनुभव भीतर से आते हैं तो इसी पूर्ण घर वापसी को आत्मज्ञान कहते हैं। लोगों ने दुनिया को अच्छे और बुरे, शुद्ध और अशुद्ध, स्वर्ग और नरक जैसी चीजों में बांट रखा है।लेकिन देखा  जाए तो भीतर और बाहर, यही बस एक चीज है। अगर आप बाहर की तरफ जाते हैं तो यह एक अंतहीन यात्रा है, लेकिन अगर आप भीतर की तरफ मुड़ जाते हैं तो सिर्फ एक पल की दूरी है। एक पल में ही आपका जीवन पूरी तरह से बदल सकता है ।

आप अपना भाग्य, अनजाने में खुद लिखते हैं। अगर आपको अपने भौतिक शरीर पर अधिकार हासिल है तो आपका 15 से 20 फ़ीसदी जीवन और भाग्य खुद आपके हाथों में होगा।अगर आपका अपने मन पर अधिकार है, तो आपके जीवन और भाग्य 50 से  60 फ़ीसदी आपके हाथों में होगा और अगर आपका अपनी जीवन ऊर्जाओं  पर अधिकार है तो आपका जीवन और भाग्य पूरी तरह से आपके हाथ में होगा।

खुश हाली पाने के लिए खुद अपने आप को ठीक करने की जरूरत है।आप सबसे महत्वपूर्ण बात ही भूल जाते हैं कि जब आप बीमार होते हैं तो आपको ही दवाई की जरूरत है, जब आप भूखे होते हैं तो आपको ही भोजन की ज़रूरत होती है। आपकी जिंदगी तब तक सही नहीं होगी जब तक आप सही काम नहीं करेंगे। जब आप सही काम करेंगे तभी आपका भाग्य आपका अपना होगा, 100 फ़ीसदी आपका अपना।

Learn to take responsibility ज़िम्मेदारी लेना सीखें

अभी दोस्तों हम लोगों ने देखा कि आपके अंदर अगर कोई कमी है तो आपको ही उसे ठीक करना होगा। लेकिन ठीक कैसे होगा? ठीक होगा जिम्मेदारी लेने से। हर रोज न जाने कितने सारे लोग अपनी असफलताओं, अपनी नाकामी को और अपनी परेशानी की जिम्मेदारी हमेशा दूसरों को देते हैं जबकि यह बहुत गलत है। आप सभी को खुद सारी जिम्मेदारी लेनी होगी। जिम्मेदारी का मतलब दुनिया का बोझ अपने सर पर लेना नहीं है, इसका सीधा मतलब है सचेतन होकर हालात के प्रति रिस्पॉन्ड करना। Inner Engineering में ज़िम्मेदारी लेने की बात को बहुत अच्छे से समझाया गया है। जब आप तय करते हैं कि मैं जिम्मेदार हूं, तो आपके पास रिस्पॉन्ड करने की क़ाबीलियत होगी, और अगर आप यह तय करते हैं कि मैं जिम्मेदार नहीं हूं, तो आपके पास रिस्पॉन्ड करने के कोई ऑप्शन ही नहीं होंगे। इसको आसानी से ऐसे समझ सकते हैं, आप ने अपनी असफलता के लिए दूसरों को दोष दिया, मतलब आपने जिम्मेदारी अपने ऊपर नहीं ली, तो आपके पास कुछ करने का, कोई सलूशन ढूंढने का कोई ऑप्शन ही नहीं बचा। क्योंकि आपने किसी और को जिम्मेदार ठहरा कर आगे निकल गए। लेकिन जब आप जिम्मेदारी अपने ऊपर लेते हैं तो हमेशा स्थिति से निपटने के लिए नए-नए तरीके ढूंढते है और जब यह तरीके आप अक्सर अपनाने लगते हैं तो अपने जीवन के हालात को ठीक करने की क्षमता अपने आप बढ़ने लगती है।

नाराजगी, गुस्सा, जलन, पीड़ा, तकलीफ और अवसाद, यह सब ऐसे जहर है, जिसे इंसान खुद पीता है और उम्मीद करता है कि किसी दूसरे को तकलीफ हो। इन सब चीजों को छोड़कर जिस पल आप यह तय करते हैं कि मैं अभी जैसा हूं उसके लिए मैं खुद जिम्मेदार हूं उसी पल से भयानक से भयानक परिस्थिति भी एक समृद्ध जीवन में बदलना शुरू हो जाती है। 

शुरुआत में सभी चीजों के प्रति जागरूक बनने की कोशिश कीजिए। अगली बार जब आप भोजन करें, तो पहले 15 मिनट किसी से बात मत कीजिए, जो भोजन आप खा रहे हैं, जो पानी पी रहे हैं, जिस हवा में सांस ले रहे हैं, बस इसके प्रति सक्रिय सचेतन रूप से रिस्पोंड करने के भाव में रहिए। प्रकृति की हर चीजों के प्रति जागरूक रहिए, उनके प्रति रिस्पॉन्ड प्रकट करते रहिए, रिस्पॉन्ड करने का मतलब अपनी कृतज्ञता का भाव रखिए। अगर भरपेट भोजन मिल रहा है तो इसके लिए कृतज्ञ होना चाहिए कितने लोगों को तो दो वक्त का भोजन भी नसीब नहीं होता। साथ ही दिन में कई बार और सुबह उठते वक्त अपने मन में दोहराते रहिए-  मेरी जिम्मेदारी असीमित है,  मैं हर चीज के लिए रिस्पॉन्ड कर सकता हूं। मैं खुद अपने जीवन का निर्माता हूं। आप इस वाक्य को दोहराते रहिए, अपनी जागरूकता बढ़ाते रहिए फिर देखिए क्या होता है?

And Now Yoga और अब योग!

Inner Engineering Book review में अब योग की चर्चा करते हैं। योग के अभ्यास से शरीर और मन की क्षमता वह दक्षता की संभावना के उच्चतम स्तर पर कायम रखा जा सकता है।

आधुनिक विज्ञान हमें बताता है कि पूरा अस्तित्व बस एक उर्जा है, जो खुद को अलग-अलग तरीकों से और अलग-अलग रूपों में अभिव्यक्त कर रहा है। योग इन आंतरिक उर्जाओं को उच्चतम संभावनाओं के लिए उन्नत बनाने, सक्रिय करने और परिष्कृत करने की तकनीक है। 

योग विज्ञान हमें बताता है कि हम पाँच परतो या तहो या सीधे कहे तो शरीरों से बने हैं। पहली परत है अन्नमय कोष । यह भौतिक या स्थूल शरीर है जिसे अन्न शरीर कह सकते हैं।

दूसरी परत मनोमय कोष या मानसिक काया की है ।

हमारी तीसरी पर है प्राणमय कोष, यानी ऊर्जा शरीर। अगर आप अपने ऊर्जा शरीर को सही संतुलन में रखते हैं तो आप के भौतिक शरीर और मानसिक शरीर में कोई बीमारी नहीं  होगी। 

एक चौथी परत है जिसे विज्ञानमय कोष या आकाशीय शरीर कहते हैं। यह ना तो भौतिक है और ना ही अभौतिक । यह दोनो  के बीच की कड़ी की तरह है। मौजूदा स्तर में अभी ये आप के अनुभव में नहीं है। अगर आप इस आयाम तक सचेतन पहुँच बनाना सीख लेते हैं ब्र्म्म्हाण्डिय घटना को जानने की आप की क्षमता में ज़बरदस्त वृद्धि हो जायेगी। 

एक पाँचवा परत भी है, आनंदमय कोश, जो पूरी तरह से अभौतिक है, जब हम भौतिक से परे इस आयाम के संपर्क में आते हैं तब हम आनंदमय हो जाते हैं। इस आयाम में समय और स्थान का प्रभाव मिट जाता है। अगर आप का भौतिक, मानसिक और उर्जा शरीर पूरी तरह से संतुलन में है तो आप आनंद काया तक पहुंच सकते हैं। योग बस शरीर मन और ऊर्जा इन तीनों आयामों को तालमेल में लाने का विज्ञान है।

Mind मन

दोस्तों जैसा कि मैंने पहले ही बताया था कि सदगुरु ने Inner Engineering को दो खंडों में  बांट कर पुस्तक को प्रस्तुत किया है।अभी तक मैंने जो कुछ बताया वो Inner Engineering book के प्रथम खंड की बात थी, पुस्तक में इससे भी ज्यादा विस्तार से चीजें बताई गई है।यहां से मैं द्वितीय खंड की कुछ समरी देने जा रहा हूं। Inner Engineering Book के द्वितीय खंड में सदगुरु ने बहुत सारी विषयों का जिक्र किया है, साथ ही उससे संबंधित साधनों के बारे में बताया है। 

शुरुआत में आप कुछ ऐसा कर सकते हैं-

Inner Engineering Book में एक बहुत बढ़िया example दिया गया है।किसी पौधे या पेड़ के सामने कुछ समय के लिए बैठ जाइए। स्वयं को  याद दिलाए कि पौधा जो सांस छोड़ रहा है उसे आप अपने अंदर ले रहे हैं और आप जो साथ छोड़ रहे हैं उसे पौधा अपने अंदर ले रहा है, इसे दिन में 5 बार दोहराई। कुछ दिनों बाद आप अपने आसपास हर चीजों से एक अलग तरह का लगाव महसूस करेंगे। 

यदि आप सच में जीवन को पूरी गहराई से जानना चाहते हैं तो आप भीतर की ओर देखें ना कि  बाहर की ओर। क्योंकि आपकी इंद्रियां केवल दृष्टि, आवाज, गंद, स्वाद और स्पर्श की बाहरी  संवेदनाओ  को पकड़ सकती हैं किंतु सारे अनुभव का स्रोत आपके भीतर है। भीतर की ओर देखना आसान नहीं होता। इसके लिए प्रयास करना पड़ता है। शुरुआत आप इस प्रयास से करें कि आप कौन हैं? जब भी आप रात को सोने के लिए जाएं तो अपने भीतर मुड़कर देखने की जानने की कोशिश करें कि आप कौन हैं और इस जागरूकता के साथ नींद में प्रवेश करें। क्योंकि नींद में कोई बाहरी व्यवधान नहीं होता, अतः यह एक शक्तिशाली अनुभव के रूप में विकसित होगा।

ध्यान के गहरे आयामों में प्रवेश करने से आपकी ऊर्जाये  ऊपर की ओर उठेगी और अनुभव के ज्यादा गहन आयाम खोलेंगी। इसलिए ध्यान कि अधिक गहन अवस्थाओं में जाने से पहले ही शरीर को उसके लिए तैयार करना बहुत आवश्यक है।हठयोग शरीर ऊर्जा के उफान को बिना किसी कठिनाई के  सहजता  से संभालने में काफी मदद करता है।

दिन भर में बस कुछ समय के लिए अपनी रीढ़ सीधी रख कर बैठे, आप देखेंगे कि यह आपके जीवन पर अचूक प्रभाव डालेगा। साथ में आप यह भी कर सकते हैं, आप अपने ध्यान को किसी एक संवेदना पर केंद्रित कीजिए- अपनी सांस, हृदय गति, अपनी नब्ज या अपनी छोटी उंगली, और एक बार में 11 मिनट तक ध्यान दीजिए। ऐसा दिन में तीन बार कीजिए यदि आपका ध्यान बट जाता है तो कोई बात नहीं, वापस से फिर ध्यान दीजिए। यह अभ्यास आपको सतर्कता से जागरूकता की ओर ले जाएगा।

चाहे मानव शरीर हो या पूरा ब्रह्मांड, दोनों ही पांच तत्वो – धरती, जल, अग्नि, वायु और आकाश से मिलकर बना है,आपके अंदर होने वाली जो इन 5 तत्वों के खेल की छोटी सी घटना है,उसी का बस एक बढ़ा चढ़ा रूप ही यह सारा ब्रह्मांड है। यदि आप इस मानवीय प्रणाली की पूरी क्षमता का अनुभव करना चाहते हैं तो आप इन पांच तत्वों पर कुछ हद तक दक्षता पानी होगी। फिर आपका जीवन अचानक साधारण से उच्चतम पहलू की ओर अग्रसर होना चालू हो जाता है। वह सांस जो आप लेते हैं, वह भोजन जो आप करते हैं, वह पानी जो आप पीते हैं, वह धरती जिस पर आप चलते हैं और वह आकाश जो आपको थामे हुए हैं- बस आपको इन सब के प्रति जागरूक रहना है, इन सब के प्रति  कृतज्ञ रहना है। 

आप ऊर्जा प्राप्त करने के लिए भोजन करते हैं, लेकिन अगर आप ढेर सारा भोजन खा लें तो आप शिथिलता अनुभव करते हैं, या ऊर्जावान? इसलिए आप अपने शरीर से पूछिए ना कि अपने जीभ से, उसके लिए सबसे ठीक भोजन क्या है। जिस तरह के भोजन से आपका शरीर सबसे अच्छा महसूस करें, वही हमेशा सबसे ठीक भोजन होता है।यहां पर एक चीज समझने लायक है, यदि आप कच्चा मांस खाते हैं तो इसे आपकी सिस्टम से बाहर आने में 70 से 72 घंटे लगेंगे, पका हुआ मांस 50 से 52 घंटे, पकी हुई सब्जी 24 से 30 घंटे, कच्ची सब्जी 12 से 15 घंटे और  फल  1:30 से 3 घंटे का समय लेगा, इसे आप खुद अंदाजा लगा सकते हैं कि पेट के लिए क्या सही है। अगर आप प्रतिदिन भोजन करने से कुछ मिनट पहले एक चम्मच देसी घी  खाते हैं तो आप का पाचन तंत्र कमाल का हो जाता है।

Happiness मन

हर मनुष्य वास्तव में अपने भीतर और बाहर खुशी तलाश रहा है। जब बात बाहर की आती है तो बहुत सारी चीजें स्थितियां तय करती हैं और इन स्थितियों पर किसी का भी पूरा नियंत्रण नहीं होता है।लेकिन जब बात आंतरिक स्थिति की आती है तो उसमें सिर्फ एक ही चीज शामिल होती है और वह है आप।

अगर आप किसी खास विचारों के बारे में नहीं सोचना चाहते तो वह ठीक पहली चीज होगी जो आपका दिमाग पैदा करेगा।मतलब जिस विचार को आप नहीं सोचना चाहते, वही विचार सबसे पहले आप के दिमाग़ मे आयेगा।  मनुष्य के मन की यही प्रकृति है।आपने शरीर और मन के रूप में जो कुछ भी  इकट्ठा किया है, वह आपके जीवन में और उसके बाद भी, बार-बार आने वाली स्थितियों का कारण बनती है। अगर आप अपने और अपने शरीर मन के बीच लगातार सचेत हो सके, तो आपने एक असीम संभावनाओं की आयाम को खोल दिया है। लेकिन आप मन की गतिविधियों को जबरदस्ती रोकने की कोशिश ना करें, नहीं तो मन और तेज भागेगा। अगर आप इस पर ध्यान नहीं देते तो विचार धीरे-धीरे कम होते जाएंगे।

योग पद्धति के अनुसार मन को 16 आयामों में बांटा गया है, इन 16 को चार भागों में रखा गया है, मन के अंतर करने वाले आयाम को बुद्धि कहा गया है, मन को संचय करने वाले आयाम यानी स्मृति को मानस कहते हैं, यह जानकारी इकट्ठा करता है। तीसरे आयाम को जागरूकता, प्रज्ञा या  चित्त कहते हैं,  यह बुद्धि और स्मृति से परे है, और चौथे आयाम को अहंकार।

Energy ऊर्जा

हर व्यक्ति की जीवन – ऊर्जाओ का एकमात्र लक्ष्य है अनंत को स्पर्श करना।यही हमारे सृजन का मूल है। अब तो आधुनिक विज्ञान ने भी यह सिद्ध कर दिया है कि संपूर्ण अस्तित्व एक ही ऊर्जा से बना है। अध्यात्मिक प्रक्रिया का अर्थ है जीवन की ओर वापस लौटना। इसका मतलब है कि अपनी जीवन – ऊर्जाओ की गहरी  बुद्धिमत्ता के अनुसार चलना।

ऊर्जा सिस्टम में बहत्तर हज़ार नाडिया या चैनल होते हैं। यह बहत्तर हज़ार नाडिया तीन बुनियादी नाड़ियों से निकलती है- दाहिनी नाड़ी को पिंगला, बाई  नाड़ी को इड़ा और बीच की नाड़ी को सुषुम्ना नाड़ी कहते हैं। यह तीन  नाडिया ऊर्जा प्रणाली का आधार होती है, पिंगला पुरुष प्रकृति का प्रतीक है, और  इड़ा नारी प्रकृति का। पिंगला और इड़ा को सूर्य और चंद्रमा की तरह भी दर्शाया जाता है। सूर्य पुरुष प्रधान गुणों का और चंद्रमा नारी सुलभ गुणों का प्रतीक है।आपके दिमाग के स्तर पर पिंगला तार्किक आयाम का प्रतीक है और जब कि इड़ा  सहज ज्ञान आयाम का।।आपके शरीर की जो केंद्रीय नाड़ी है-  सुषुम्ना,  उसमें जब एक बार ऊर्जाए प्रवेश कर जाती हैं, तब आप में एक तरह का संतुलन बना रहता है, चाहें आपके आसपास कुछ भी क्यों ना हो रहा हो। 

शरीर तंत्र में चक्र वह शक्तिशाली केंद्र है, जहां नाडिया खास तरीके से मिलकर ऊर्जा का भंवर बनाते हैं। शरीर में कुल 114 चक्र है, 2 शरीर के बाहर और 112 शरीर के अंदर, इन 112 चक्रों में से 7 मुख्य चक्र हैं, ये सात चक्र है- मूलाधार जो गुदा और जननांग के बीच स्थित होता है, स्वाधिष्ठान चक्र, जो जननांग से ठीक ऊपर होता है, मणिपुर चक्र, जो नाभि से तीन चौथाई इंच नीचे होता है, अनाहत चक्र जो पसलियों के मिलने की जगह के नीचे गड्ढे में होता है, विशुद्धि चक्र, जो कंठ के गड्ढे में होता है, आज्ञा चक्र, दोनों  भौंहों के बीच में होता है और सहस्त्रार चक्र, सिर के सबसे ऊपरी जगह पर होता है,( यह नवजात शिशु के सिर में ऊपर सबसे कोमल जगह होती है)

यह सात चक्र विभिन्न आयाम है, जिनके माध्यम से आपकी उर्जा को अभिव्यक्ति मिलती है।

Conclusion

दोस्तों मैंने Inner Engineering Book को पढ़कर कुछ महत्वपूर्ण अंशों के साथ आपके सामने प्रस्तुत किया है। 

Inner Engineering Book में ऐसे विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई है जिसका प्रयोग करके आप अपने अंदर सचेतन रूप से हर चीज़ के प्रति रिस्पॉन्ड करने की क्षमता को विकसित कर सकतें है।अपने आप को प्रकृति के साथ एक सही तालमेल में, अपने आप को एक सही आयाम में ला सकते हैं।

इस तरह के आंतरीक, आध्यात्मिक और शारीरिक विकास के लिए, अगर एक सही गुरु का साथ मिल जाए तो कितना अच्छा हो। इसी बात को ध्यान में रखते हुए isha inner engineering केंद्र में एक inner engineering program नाम का course sadhguru द्वारा चलाया जाता है। इस inner engineering course को करने से पहले अगर आप inner engineering book जो sadhguru द्वारा लिखी गई है, उसे पढ़ लेते हैं तो आप को inner engineering program को attend करते वक्त चीजों को समझने में काफ़ी आसानी होगी।

अगर आप inner engineering book हिन्दी में देखना चाहते है या किसी और language में तो इस लिंक के थ्रू चेक कर सकते हैं।यह बुक हिंदी और इंग्लिश के साथ-साथ कई भाषाओं में उपलब्ध है।

inner engineering program की जानकारी आप इस लिंक के थ्रू मिल सकती हैं।

FAQ

सदगुरु जी का जन्म कब हुआ था ?

सदगुरु जी की माता का नाम सुशीला और उनके पिता का नाम वासुदेव था। उनके घर 3 सितंबर 1957 को मैसूर शहर में एक पुत्र का जन्म हुआ, जिसका नाम जगदीश रखा गया।

सदगुरु जी का पूरा नाम क्या है ?

सदगुरु जी का नाम जगदीश है। घर में उन्हें ‘जग्गी’ कहकर बुलाया जाता था। आज कल सदगुरु जी को सदगुरु जग्गी वासुदेव के नाम से जानते हैं।

सदगुरु जी का आश्रम इंडिया में कहाँ है?

सदगुरु जी का आश्रम भारत और विश्व के कई शहरों में है। अगर उनके Main Center की बात करें तो वो Isha Yoga Center के नाम से Coimbatore के  Velliangiri Foothills में हैं। Isha Yoga Center की स्थापना सदगुरु जी ने ही की है।

Inner Engineering क्या है?

Inner Engineering course करने से आप जीवन के प्रति अपने नज़रिये में काफ़ी बदलाव महसूस करते हैं। Inner Engineering course को इस हिसाब से तैयार किया गया है कि ये कोर्स आप के आंतरिक जीवन पर, आप के आंतरिक पहलुओं पर काम करता है।Inner Engineering course के दौरानआपको शांभवी महामुद्रा सिखाई जाती है।

क्या inner engineering book हिन्दी में भी है?

Inner Engineering book कई भाषाओं में है। आप हिन्दी की बुक इस लिंक से चेक कर हैं।

Inner Engineering कोर्स करने की कोई age limit है?

Inner Engineering कोर्स करने के लिए minimum age 15 Years होनी चाहिए। साथ ही अगर उम्र 18 से कम की है, तो Inner Engineering कोर्स में रेजिस्ट्रेशन कराने से पहले माता-पिता की सहमति ज़रूरी है।

Inner Engineering कोर्स करने के फ़ायदें क्या क्या है?

Inner Engineering कोर्स करने से चिंता कम होता है। किसी तरह का कोई stress नहीं होता है।Focus और एकाग्रता बढ़ती है। साथ ही शरीर में ऊर्जा का लेवल भी बढ़ता है।

Inner Engineering ऑनलाइन कोर्स फ़ीस कितनी है ?

Inner Engineering ऑनलाइन कोर्स की फ़ीस आप इस लिंक से चेक कर सकते हैं। Current में इसका price English में 3200Rs. और Regional language में 1600Rs.  current में New Year का offer Price चल रहा है।इसलिए price कम है। इस तरह के ऑफ़र समय समय पर  आते रहते हैं।

दोस्तों अपना बहुमूल्य समय देने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। आप अपनी प्रतिक्रिया ज़रूर दीजियेगा। 

बुक चस्का का साथ, मन में विश्वास।

Other Important Book

Ichigo Ichie book summary

Twelfth Fail Book Summary

Leave a comment