Ayodhya Ram Mandir Book by Swadesh Singh review

Ayodhya Ram Mandir – Bharat’s quest of Ram-Rajya

भगवान राम की नगरी अयोध्या में स्थित Ayodhya Ram Mandir, कुछ कट्टर पंथियों के कारण हमेशा से विवादों में रही है।भारतीय न्याय व्यवस्था के मज़बूत और न्यायप्रिय होने के कारण आख़िरकार मंदिर का निर्माण कार्य सम्भव हो पाया। आधुनिक समाज में कई लोग इस विषय को जानना और समझना चाहते है। उनके इसी जिज्ञासु प्रवृति को शान्त करने के लिए स्वदेश सिंह ने एक पुस्तक की रचना की, जिसका नाम है “अयोध्या राम मंदिर”। आज इसी किताब के बारे में आप सभी को जानकारी मिलने वाली है। 

अगर स्वदेश सिंह की बात करें तो वो एक  शिक्षक, लेखक और कार्यकर्ता हैं। वे नियमित रूप से समाचार पत्रों, ऑनलाइन प्लेटफार्मों और अकादमिक पत्रिकाओं के लिए लिखते रहे हैं।वर्तमान में वे दिल्ली विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान पढ़ाते हैं।

यहाँ पर एक महत्तवपूर्ण बात का ज़िक्र करना आवश्यक है; स्वदेश सिंह जी की ये किताब Ayodhya Ram Mandir, अंग्रेज़ी भाषा में उपलब्ध है। अगर भविष्य में इसका कोई हिन्दी संस्करण आता है तो मैं इसकी जानकारी अवश्य दूँगा। फ़िलहाल मैं अभी इसी अंग्रेज़ी संस्करण के किताब Ayodhya Ram Mandir की बात करने वाला हूँ।

अगर इस किताब “Ayodhya Ram Mandir” की बात करें तो इसमें जहां पर राम मंदिर की स्थापना से सम्बन्धित जानकारी मिलती है, तो वहीं पर भारत पर राज करने वाले विभिन्न मुस्लिम शासकों द्वारा समय-समय पर इस मंदिर पर किए गए विध्वंसक कार्यवाही की भी जानकारी मिलती है।जिसमें कई सारे लोगों से इस मंदिर की सुरक्षा के लिए कितनी सारी क़ुर्बानी भी दी है। इससे समझ में आता है कि सदियों से यह मंदिर कितना ज़्यादा सनातनी लोगों के लिए एक आस्था का प्रतीक रहा है। पुस्तक में इंडोनेशिया, मॉरीशस और थाईलैंड जैसे देशों का भी ज़िक्र किया है, जिससे श्री राम भक्ति के अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव का भी पता चलता है। 

Along the Sarayu, Lies the Invincible

“Ayodhya Ram Mandir” किताब के प्रथम अध्याय में अयोध्या की भूमि के महत्व पर चर्चा की गई है। इस किताब में इक्ष्वाकु वंश और उसके सभी संबंधित राजाओं के बारे में विस्तार से बताया गया है। यह बताता है कि कैसे अयोध्या भारत के इतिहास में हमेशा एक प्रमुख हिस्सा रही है।साथ ही, Ayodhya Ram Mandir से जुड़ी सारी एतिहासिक बातें जैसे कि इसके अस्तित्व से जुड़ी बातें, विभिन्न हिस्टॉरिकल पिरीयड में इस Ayodhya Ram Mandir की स्थिति के बारे में भी बताया है।जैसे कि मौर्य कल में, गुप्त काल या मुग़ल काल या फिर अंग्रेजों के काल में मन्दिर की स्थिति क्या थी? और साथ ही किस युग में मन्दिर को लेकर सबसे ज़्यादा संघर्ष करना पड़ा। अगर मन्दिर के तोड़ने की बात की जाए तो स्वदेश जी ने बाबर के ऐतिहासिक विवरण का बड़ी सावधानीपूर्वक विवरण दिया है। कैसे मुगल सम्राट बाबर ने श्री राम जी को समर्पित मंदिर को ध्वस्त कर दिया और उसके स्थान पर एक मस्जिद का निर्माण कराया। यह कथा सदियों से चले आ रहे हिंदू के प्रतिरोध, संघर्षों से लेकर झड़पों और हमारी पवित्र भूमि की बहाली के लिए किए गए संघर्षों को दर्शाती है।

The Long Haul

इस किताब Ayodhya Ram Mandir का दूसरा अध्याय राम मंदिर आंदोलन से जुड़ी सामाजिक-राजनीतिक गतिविधियों का तथ्यात्मक विवरण प्रदान करता है।इसमें पता चलता है कि कैसे विविध साहित्यिक स्रोतों के माध्यम से विवादित भूमि पर हिंदू के दावों का पता चलता है और साथ ही आंदोलन का नेतृत्व करने में साधुओं, संतों, वीएचपी और आरएसएस की क्या भागीदारी रही है।यह अध्याय मुख्यतः Ayodhya Ram Mandir के मामले को कोर्ट में दाखिल करने से भी सम्बंधित है। जिसमें 1822 में पहली बार इस मामले को भारतीय न्यायपालिका में दायर किया गया था। तब से लेकर 2019 तक इस मामले की कोर्ट में क्या स्थिति रही है, इस बात का ज़िक्र भी इस किताब में मिलता है।

The Verdict

तीसरा अध्याय, ‘द वर्डिक्ट’, 2003 एएसआई रिपोर्ट और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के आवश्यक संदर्भों पर चर्चा करता है, जिसके कारण 2019 में सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आया, जिससे राम लला का वनवास समाप्त हो गया।

From Verdict to vision / Echoes of Treta in Ayodhya

चौथा अध्याय, राम जन्मभूमि मंदिर की स्थापत्य भव्यता के माध्यम से राम-राज्य की कल्पना करता है। Ayodhya Ram Mandir किताब में, लेखक वर्तमान परिस्थिति की चर्चा करते हैं। जिसमें वे अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण की बातें बताते हैं।

अंतिम अध्याय, ‘अयोध्या में त्रेता की गूँज’, रामलला की वापसी के साथ शहर के पुनर्जागरण का वर्णन करता है। मंदिर निर्माण में इस्तेमाल किए गए पत्थरों और मूर्तियों के डिजाइन, नक्काशी और वास्तुकला, पर भी चर्चा करते हैं, और साथ ही इस बात की संपूर्ण जानकारी भी मिलती है कि Ayodhya Ram Mandir के पुरे निर्माण के बाद पूरा मंदिर और परिसर कैसा दिखेगा। जिस तरह से लेखक ने मन्दिर निर्माण के बारे में लिखा है वह एक तरह से आपकी आंखों के सामने पूरे मंदिर की एक तस्वीर सा बना देता है। स्वदेश सिंह ने अयोध्या को विश्व पटल पर स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार के योजनाओं और प्रयासों की भी चर्चा की। 

Ayodhya Ram Mandir के लेखक स्वदेश सिंह इस बारे में भी चर्चा करते हैं कि मंदिर के निर्माण के साथ-साथ अयोध्या के विकास के लिए कैसी योजना बनाई गई है।लेखक ने अयोध्या के आसपास मौजूद सभी महतवपूर्ण जगहों का ज़िक्र किया है, जैसे सरयू नदी, हनुमानगढ़ी, कनक भवन, श्री नागेश्वरनाथ मंदिर, सीता की रसोई आदि। 

Conclusion

भारतीय सभ्यता की सामूहिक स्मृति का अभिन्न अंग भगवान राम धर्म और न्याय के प्रतीक हैं। राम के सार और महत्व को भारतीय उपमहाद्वीप और उससे परे सदियों से सहज रूप से समझा जाता रहा है।स्वदेश सिंह की किताब Ayodhya Ram Mandir को पढ़ने से, इस जगह से जुड़ी बहुत सारी बातें आप को एक जगह पर ही मिल जाती है।किताब में हर जगह पर उनके सोध और प्रयास को बड़ी आसानी से महसूस किया जा सकता है।यह किताब लगभग 160 पृष्ठों की है, इसलिए इसे बड़ी आसानी से कुछ ही सिटिंग में पढ़ा जा सकता  है।पुस्तक एक टैग लाइन के साथ समाप्त होती है – Bharat’s quest of Ram-Rajya ।

अगर आप इस किताब के बारे में और जानकारी जानना चाहते हैं तो आप इस लिंक के थ्रू जान सकते हैं।

कुल मिलाकर, यह किताब Ayodhya Ram Mandir विशेष रूप से पढ़ने लायक है।इस पुस्तक में वह सब कुछ है जो किसी को भी अयोध्या राम मंदिर के बारे में जानना चाहिए। अब जब कि राम मन्दिर सभी भक्त जनों के दर्शन के लिए खुल चुका है, तो किताब को पढ़ने के बाद अयोध्या में राम मन्दिर का दर्शन करना, एक अलग अनुभव देगा।

Amazon में इस किताब को 5 star की रेटिंग मिली है।

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